बहुत समय पहले, जापान के एक शांत तटीय गाँव में उराशिमा तारो नाम का एक नौजवान मछुआरा रहता था। वह न केवल अपने काम में निपुण था, बल्कि उसका हृदय भी अत्यंत कोमल था। वह अपने बूढ़े माता-पिता का इकलौता सहारा था। समुद्र की लहरों के बीच नाव चलाते हुए तारो अक्सर सोचता कि पानी की इस अथाह गहराई में कौन सी दुनिया बसती होगी।
एक दिन, जब तारो समुद्र तट पर टहल रहा था, उसने देखा कि कुछ शरारती बच्चे एक छोटे से कछुए को घेर कर खड़े हैं और उसे डंडों से परेशान कर रहे हैं। कछुआ दर्द से तड़प रहा था। तारो से यह नहीं देखा गया। वह तुरंत उन बच्चों के पास गया और अपनी जेब से कुछ सिक्के निकालकर उन्हें दिए। "बच्चों, इन सिक्कों से जाकर कुछ मीठा खा लो और इस बेज़ुबान जीव को छोड़ दो," तारो ने प्यार से समझाया।
बच्चे सिक्के पाकर खुशी-खुशी वहाँ से भाग गए। तारो ने धीरे से उस घायल कछुए को उठाया, उसे सहलाया और वापस समुद्र की लहरों में छोड़ दिया। कछुए ने पानी में जाने से पहले मुड़कर तारो को ऐसे देखा, मानो वह उसे धन्यवाद कह रहा हो।
कुछ दिन बीत गए। एक दिन तारो अपनी छोटी सी नाव में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने गया। अचानक, पानी में हलचल हुई और एक विशाल कछुआ उसकी नाव के पास उभर कर आया। कछुए ने इंसानी आवाज़ में कहा, "उराशिमा तारो! मैं वही कछुआ हूँ जिसकी जान आपने उस दिन तट पर बचाई थी। मैं समुद्र के देवता 'रयुजिन' (Ryujin) का सेवक हूँ। मेरी जान बचाने के इनाम के रूप में, समुद्र की राजकुमारी 'ओतोहिमे' ने आपको हमारे जादुई जल-महल (Ryugu-jo) में आमंत्रित किया है।"
तारो आश्चर्यचकित था। उसने झिझकते हुए कहा, "लेकिन मैं पानी के भीतर कैसे जा सकता हूँ?" कछुए ने मुस्कुराकर कहा, "बस मेरी पीठ पर बैठ जाइए, बाकी सब मुझ पर छोड़ दीजिए।"
तारो कछुए की मजबूत पीठ पर बैठ गया। अगले ही पल, कछुए ने पानी में डुबकी लगाई। तारो यह देखकर हैरान रह गया कि पानी के भीतर वह आसानी से सांस ले पा रहा था। वे दोनों नीले पानी की गहराई में उतरते गए। रास्ते में चमकीले रंग की मछलियाँ, चमकते हुए मूंगे (Coral) और झूमते हुए समुद्री पौधे उनका स्वागत कर रहे थे।
अंततः वे लाल मूंगे और सफेद मोतियों से बने एक अत्यंत विशाल और भव्य महल के सामने पहुँचे। यह 'रयुगु-जो' (ड्रैगन पैलेस) था। महल के दरवाज़े पर स्वयं राजकुमारी ओतोहिमे खड़ी थीं। वह इतनी सुंदर थीं मानो समुद्र की सारी चमक उनके चेहरे पर सिमट आई हो। राजकुमारी ने तारो का हाथ पकड़कर उसे महल के भीतर ले लिया।
महल के भीतर का नज़ारा जादुई था। तारो के लिए सबसे स्वादिष्ट व्यंजनों की दावत सजाई गई। समुद्री परियों ने उसके लिए मधुर संगीत बजाया और नृत्य किया। महल के चार अलग-अलग दरवाज़ों के बाहर चार अलग-अलग मौसम एक साथ दिखाई देते थे—एक ओर वसंत के खिलते फूल थे, तो दूसरी ओर सर्दियों की गिरती बर्फ। तारो इस जादुई दुनिया में इतना खो गया कि उसे समय का आभास ही नहीं रहा। उसे लगा जैसे उसे यहाँ आए बस कुछ ही दिन हुए हैं।
लेकिन एक रात, दावत के बीच, तारो को अचानक अपने बूढ़े माता-पिता और अपने गाँव की याद आई। उसका दिल भारी हो गया। उसने राजकुमारी से जाकर कहा, "राजकुमारी, आपका यह महल स्वर्ग से भी सुंदर है, लेकिन मुझे अपने माता-पिता के पास वापस जाना होगा। वे मेरे बिना चिंतित होंगे।"
राजकुमारी की आँखों में आंसू आ गए। उसने कहा, "तारो, मैं तुम्हें रोकना नहीं चाहती, लेकिन यह एक जादुई दुनिया है।" विदा करते समय राजकुमारी ने तारो के हाथ में मोतियों से जड़ा एक सुंदर सा संदूक (Tamatebako) दिया। "यह संदूक तुम्हें मेरी याद दिलाएगा। लेकिन एक बात हमेशा याद रखना तारो—चाहे कुछ भी हो जाए, इस संदूक को कभी मत खोलना।"
तारो ने वादा किया और उसी विशाल कछुए की पीठ पर बैठकर वापस अपने गाँव के तट पर लौट आया।
जब तारो तट पर उतरा, तो वह हैरान रह गया। गाँव का नज़ारा पूरी तरह बदल चुका था। छोटी झोपड़ियों की जगह बड़ी इमारतें बन गई थीं। तट पर टहलते लोगों के कपड़े अलग थे। तारो भागता हुआ अपने घर की ओर गया, लेकिन वहाँ कोई और ही घर बना हुआ था। उसने एक राहगीर से पूछा, "क्या आप उराशिमा तारो के माता-पिता को जानते हैं?"
राहगीर ने अचरज से कहा, "उराशिमा तारो? मैंने अपने दादा की कहानियों में सुना था कि लगभग तीन सौ साल पहले वह नाम का एक मछुआरा समुद्र में गया था और कभी लौटकर नहीं आया।"
तारो के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। ड्रैगन पैलेस में बिताए गए वे चंद दिन दरअसल पृथ्वी के तीन सौ साल थे! उसके माता-पिता और जानने वाले सभी लोग सदियों पहले इस दुनिया से जा चुके थे।
तारो एकदम अकेला और टूट चुका था। निराशा और दुख में, राजकुमारी की चेतावनी भूलकर, उसने उस जादुई संदूक को खोल दिया। जैसे ही ढक्कन खुला, संदूक के भीतर से सफेद धुएं का एक घना बादल निकला और तारो के शरीर से लिपट गया। वह धुआँ उन तीन सौ सालों का समय था जिसे संदूक में कैद किया गया था। देखते ही देखते नौजवान तारो के बाल सफेद हो गए, उसकी त्वचा पर झुर्रियां पड़ गईं, और वह एक अत्यंत बूढ़े व्यक्ति में बदल गया, जो बस समुद्र की लहरों को निहारता रह गया।
संस्कृति की झलक:
'उराशिमा तारो' जापान की सबसे पुरानी और दिल को छू लेने वाली लोक कथाओं में से एक है, जिसका ज़िक्र 8वीं शताब्दी के जापानी साहित्य में भी मिलता है। यह कहानी जापानी संस्कृति में समय के महत्व, आज्ञापालन और कर्मों के फल की गहरी समझ को दर्शाती है। जापानी कलाकृतियों में ड्रैगन पैलेस (रयुगु-जो) का अक्सर समुद्र के अथाह रहस्यों के प्रतीक के रूप में चित्रण किया जाता है।
कहानी से सीख:
समय कभी किसी के लिए नहीं रुकता, यह दुनिया की सबसे मूल्यवान चीज़ है। साथ ही, दिए गए वादों और चेतावनियों का हमेशा सम्मान करना चाहिए।
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