बहुत पुरानी बात है, जापान के एक गाँव में एक बुजुर्ग जोड़ा रहता था। उनके पास खेत, घर और शांतिपूर्ण जीवन था, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। रोज़ वे गाँव के मंदिर में जाते और प्रार्थना करते, "हे ईश्वर! हमें एक बच्चा दे दो, चाहे वह हमारी उंगली के पोर जितना ही छोटा क्यों न हो। हम उसे दुनिया की सारी खुशियाँ देंगे।"
देवताओं ने उनकी प्रार्थना सुन ली। कुछ समय बाद बुढ़िया ने एक बेटे को जन्म दिया। लेकिन यह कोई साधारण बच्चा नहीं था। वह बच्चा सचमुच सिर्फ एक इंच (लगभग एक अंगूठे जितना) लंबा था! हैरान लेकिन बेहद खुश माता-पिता ने उसका नाम 'इसुन बोशी' रखा, जिसका अर्थ होता है 'एक इंच का लड़का'।
माता-पिता ने उसे बहुत प्यार से पाला। उन्होंने उसे भरपूर खाना खिलाया, लेकिन समय बीतने के साथ इसुन बोशी की लंबाई एक इंच से ज़्यादा नहीं बढ़ी। हालाँकि वह शरीर से छोटा था, लेकिन उसकी बुद्धि और फुर्ती किसी भी आम बच्चे से कई गुना ज़्यादा थी। उसका हृदय एक सच्चे योद्धा जैसा था।
जब वह पंद्रह वर्ष का हुआ, तो उसने अपने माता-पिता के सामने हाथ जोड़कर कहा, "पिताजी, मैं राजधानी क्योटो जाना चाहता हूँ। मैं वहाँ मेहनत करूँगा और एक महान समुराई योद्धा बनकर आपका नाम रोशन करूँगा।"
माता-पिता को उसकी चिंता हुई, लेकिन वे उसकी लगन को जानते थे। उन्होंने उसे विदा करने की तैयारी की। इसुन बोशी के पास साधारण हथियार नहीं हो सकते थे, इसलिए बुढ़िया ने उसे एक सिलाई की सुई दी, जिसे उसने अपनी म्यान में तलवार की तरह रख लिया। एक सूप का प्याला उसकी नाव बना और एक चॉपस्टिक (Chopstick) को उसने चप्पू की तरह इस्तेमाल किया।
नदी की तेज़ धाराओं और बड़ी-बड़ी मछलियों से बचता हुआ, हमारा एक इंच का वीर योद्धा राजधानी क्योटो पहुँच गया। वहाँ वह शहर के सबसे अमीर और शक्तिशाली मंत्री के महल में गया। द्वारपाल ने उसे देखा ही नहीं, तब इसुन बोशी ने ज़ोर से चिल्लाकर कहा, "कृपया नीचे देखिए! मैं यहाँ काम माँगने आया हूँ।"
मंत्री उसकी छोटी सी काया, लेकिन आत्मविश्वास से भरी आवाज़ देखकर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने इसुन बोशी को अपनी इकलौती बेटी, राजकुमारी का अंगरक्षक बना दिया। इसुन बोशी हमेशा राजकुमारी के कंधे या जेब में बैठकर उसकी रक्षा करता था।
एक दिन राजकुमारी शहर के बाहर एक प्रसिद्ध मंदिर में पूजा करने गई। लौटते समय अचानक आसमान काला हो गया और जंगल से एक भयानक और विशाल राक्षस (Oni) उनके सामने आ खड़ा हुआ। राक्षस के हाथ में एक जादुई हथौड़ा था। वह राजकुमारी को उठाकर ले जाना चाहता था। सारे सैनिक डरकर भाग गए, लेकिन इसुन बोशी अपनी सुई रूपी तलवार निकालकर राजकुमारी के सामने खड़ा हो गया।
राक्षस ज़ोर से हँसा, "तू एक कीड़ा मेरा क्या बिगाड़ेगा?" और उसने इसुन बोशी को एक ही बार में निगल लिया।
लेकिन इसुन बोशी घबराया नहीं। राक्षस के पेट के अंदर पहुँचकर, उसने अपनी तेज़ सुई से राक्षस के पेट में ज़ोर-ज़ोर से वार करना शुरू कर दिया। राक्षस दर्द से तड़पने लगा। पेट के अंदर मचे इस कहर से बचने के लिए राक्षस ने ज़ोर से उल्टी की और इसुन बोशी को बाहर थूक दिया। हार मानकर और दर्द से कराहता हुआ राक्षस जंगलों में भाग गया, लेकिन हड़बड़ी में वह अपना जादुई हथौड़ा (Uchide no kozuchi) वहीं छोड़ गया।
राजकुमारी ने खुश होकर उस जादुई हथौड़े को उठाया। इस हथौड़े की खासियत थी कि इसे हिलाकर जो भी माँगा जाए, वह मिल जाता था। राजकुमारी ने हथौड़ा हिलाते हुए कहा, "हे जादुई हथौड़े, इस वीर इसुन बोशी को एक सामान्य और लंबे कद का नौजवान बना दो!"
हथौड़ा हिलते ही एक जादुई रोशनी हुई और देखते ही देखते वह एक इंच का लड़का एक बेहद सुंदर, मजबूत और लंबे कद के समुराई योद्धा में बदल गया। मंत्री उसकी बहादुरी से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी इसुन बोशी से कर दी। इसुन बोशी ने अपने बूढ़े माता-पिता को भी राजधानी बुला लिया और वे सभी जीवन भर सुख और सम्मान के साथ रहे।
संस्कृति की झलक:
'इसुन बोशी' जापान की सबसे प्रिय लोक कथाओं (Otogizōshi) में से एक है। जापानी संस्कृति में यह कहानी 'अंडरडॉग' (कमज़ोर माने जाने वाले व्यक्ति) की जीत का एक शानदार उदाहरण है। कहानी में इस्तेमाल हुआ जादुई हथौड़ा 'उचिदे नो कोज़ुची' जापानी पौराणिक कथाओं का एक प्रसिद्ध प्रतीक है, जिसे अक्सर समृद्धि और धन के देवता दाकोकुटेन के हाथों में देखा जाता है।
कहानी से सीख:
किसी भी व्यक्ति की योग्यता और साहस का आकलन उसके शारीरिक आकार या बाहरी रूप-रंग से नहीं किया जा सकता। सच्ची ताकत हमारे आत्मविश्वास और निडर हृदय में बसती है।
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