बहुत पुरानी बात है, जापान के एक शांत और सुंदर गाँव में एक बूढ़ा और बुढ़िया रहते थे। वे बहुत दयालु और मेहनती थे, लेकिन उनके जीवन में एक ही दुख था—उनकी कोई संतान नहीं थी। रोज़ाना की तरह, एक दिन बूढ़ा आदमी पहाड़ों पर लकड़ियाँ काटने गया और बुढ़िया पास की नदी में कपड़े धोने चली गई।
जब बुढ़िया नदी में कपड़े धो रही थी, तो उसने देखा कि पानी में एक बहुत ही विशाल और सुंदर आड़ू (Peach) बहता हुआ आ रहा है। बुढ़िया ने इतना बड़ा आड़ू पहले कभी नहीं देखा था। उसने मेहनत करके उस भारी आड़ू को पानी से बाहर निकाला और घर ले आई।
शाम को जब बूढ़ा आदमी घर लौटा, तो वह भी उस विशाल आड़ू को देखकर हैरान रह गया। दोनों ने सोचा कि इसे काटकर खाया जाए। लेकिन जैसे ही बूढ़े ने चाकू से आड़ू को काटना चाहा, आड़ू अपने आप दो टुकड़ों में खुल गया और उसके अंदर से एक बेहद सुंदर और स्वस्थ रोता हुआ बच्चा निकला!
दोनों की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने माना कि यह बच्चा देवताओं का वरदान है। आड़ू (जापानी में 'मोमो') से जन्म लेने के कारण उन्होंने उसका नाम 'मोमोतरो' (Momotaro) यानी 'पीच बॉय' रखा।
मोमोतरो बहुत तेज़ी से बड़ा हुआ। वह गाँव का सबसे ताकतवर, बुद्धिमान और दयालु लड़का था। लेकिन उन दिनों गाँव वाले एक बड़ी मुसीबत में थे। पास ही समुद्र के बीच 'ओनिगाशिमा' (राक्षसों का द्वीप) था, जहाँ से भयानक राक्षस (Oni) आकर गाँव वालों को परेशान करते थे और उनका सामान लूट ले जाते थे।
एक दिन मोमोतरो ने अपने माता-पिता से कहा, "मैं ओनिगाशिमा जाऊंगा और उन राक्षसों को सबक सिखाऊंगा ताकि हमारे गाँव वाले शांति से रह सकें।" माता-पिता पहले तो डरे, लेकिन मोमोतरो के दृढ़ निश्चय को देखकर उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया। बुढ़िया ने रास्ते के लिए मोमोतरो को जापान के खास बाजरे के लड्डू (Kibi Dango) बनाकर दिए, जिन्हें खाने से सौ आदमियों की ताकत आ जाती थी।
मोमोतरो अपनी यात्रा पर निकल पड़ा। रास्ते में उसे एक बात करने वाला कुत्ता मिला। कुत्ते ने भोंकते हुए कहा, "मोमोतरो, तुम कहाँ जा रहे हो? मुझे बहुत भूख लगी है।" मोमोतरो ने उसे एक लड्डू दिया और बताया कि वह राक्षसों से लड़ने जा रहा है। लड्डू खाते ही कुत्ते में अद्भुत ताकत आ गई और वह बोला, "मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगा!"
थोड़ी दूर आगे चलने पर उन्हें एक पेड़ पर एक बंदर मिला। बंदर ने भी लड्डू खाया और उनकी टीम में शामिल हो गया। फिर उन्हें एक तीतर (Pheasant bird) मिला। लड्डू खाकर वह भी मोमोतरो का साथी बन गया।
अब मोमोतरो, कुत्ता, बंदर और तीतर एक नाव में बैठकर ओनिगाशिमा द्वीप पहुँचे। द्वीप पर राक्षसों का एक बड़ा सा किला था। लड़ाई शुरू हुई! तीतर उड़कर राक्षसों की आँखों पर चोंच मारने लगा, बंदर राक्षसों को खरोंचने और उनके हथियार छीनने लगा, और कुत्ता उनके पैरों पर काटने लगा। इस बीच, मोमोतरो ने अपनी जादुई ताकत और तलवार से राक्षसों के सरदार को हरा दिया।
राक्षसों के सरदार ने हार मान ली और मोमोतरो के सामने घुटने टेक दिए। उसने वादा किया कि वे अब कभी किसी इंसान को परेशान नहीं करेंगे और गाँव वालों का सारा लूटा हुआ खज़ाना भी वापस कर दिया। मोमोतरो अपने दोस्तों के साथ एक नायक की तरह गाँव लौटा। बूढ़े और बुढ़िया ने उसे खुशी से गले लगा लिया और वे सभी जीवन भर सुख से रहे।
संस्कृति की झलक:
'मोमोतरो' जापान की सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय लोक कथाओं में से एक है। जापानी संस्कृति में बड़ों का सम्मान (Filial Piety), साहस और प्रकृति के प्रति प्रेम को बहुत महत्व दिया जाता है। यह कहानी दर्शाती है कि जापान में 'टीम वर्क' (एकजुट होकर काम करना) को कितनी अहमियत दी जाती है, क्योंकि मोमोतरो ने अकेले नहीं, बल्कि अपने अलग-अलग साथियों की मदद से बुराई पर जीत हासिल की।
कहानी से सीख:
सच्ची बहादुरी और अच्छे इरादों के साथ अगर हम एकजुट होकर काम करें, तो हम दुनिया की किसी भी बड़ी से बड़ी मुसीबत या 'राक्षस' को हरा सकते हैं।
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