रविवार, 12 अप्रैल 2026

बाबा यागा (Baba Yaga): मुर्गी के पैरों वाले घर की रहस्यमयी डायन - रूस की एक अद्भुत लोक कथा

"Baba Yaga flying in a mortar - Russian folktale"

रूस के घने और अंधेरे जंगलों के पास एक व्यापारी अपनी पत्नी और प्यारी बेटी वासिलिसा (Vasilisa) के साथ रहता था। वासिलिसा बहुत सुंदर और दयालु थी। जब वासिलिसा आठ साल की थी, तब उसकी माँ गंभीर रूप से बीमार पड़ गई। अपनी मृत्यु से पहले, माँ ने वासिलिसा को पास बुलाया और उसे लकड़ी की एक छोटी सी जादुई गुड़िया दी।

माँ ने कहा, "मेरी प्यारी बच्ची, इस गुड़िया को हमेशा अपने पास रखना। जब भी तुम किसी मुश्किल में हो, तो इस गुड़िया को कुछ खाने को देना और इससे मदद माँगना। यह तुम्हें सही रास्ता दिखाएगी।"



माँ के निधन के कुछ सालों बाद, व्यापारी ने एक दूसरी औरत से शादी कर ली। नई सौतेली माँ और उसकी दो बेटियाँ वासिलिसा से बहुत जलती थीं। वे उसे दिन-भर घर के सबसे भारी काम करवातीं, ताकि वह थककर बदसूरत हो जाए। लेकिन वासिलिसा की गुड़िया हमेशा रात में उसकी मदद करती, जिससे वह हमेशा ताज़ा और सुंदर बनी रहती।

एक बार, वासिलिसा के पिता काम से एक लंबी यात्रा पर गए। सर्दियों की एक भयानक रात थी और बाहर बर्फीला तूफान चल रहा था। सौतेली माँ ने जानबूझकर घर की आग बुझा दी और वासिलिसा से कहा, "जाओ, जंगल के बीचों-बीच रहने वाली 'बाबा यागा' के पास से आग लेकर आओ। जब तक आग न मिले, घर वापस मत लौटना!"

बाबा यागा एक भयानक और रहस्यमयी डायन थी, जिसके पास जाने वाला कभी लौटकर नहीं आता था। वासिलिसा डर के मारे कांपने लगी, लेकिन उसने अपनी जेब से गुड़िया निकाली, उसे रोटी का एक टुकड़ा खिलाया और मदद माँगी। गुड़िया की आँखों में चमक आ गई और उसने कहा, "डरो मत वासिलिसा, मेरे पीछे-पीछे चलो।"

गुड़िया के बताए रास्ते पर चलते हुए वासिलिसा घने जंगल में पहुँच गई। रास्ते में उसने तीन रहस्यमयी घुड़सवार देखे—एक सफेद कपड़ों में (जो सुबह का प्रतीक था), एक लाल कपड़ों में (जो सूरज था), और एक काले कपड़ों में (जो रात का प्रतीक था)।

आखिरकार, वह बाबा यागा के घर पहुँची। वह कोई साधारण घर नहीं था! वह एक झोपड़ी थी जो मुर्गी के दो विशाल पैरों पर खड़ी थी और गोल-गोल घूम रही थी। उस घर के चारों ओर इंसानी हड्डियों की बाड़ (Fence) बनी थी, और उन पर खोपड़ियाँ लटकी थीं जिनकी आँखों से भयानक रोशनी निकल रही थी।

तभी तेज़ हवा चली, पेड़ हिलने लगे और बाबा यागा वहाँ आ पहुँची। वह किसी झाड़ू पर नहीं, बल्कि एक उड़ने वाले बड़े से मोर्टार (ओखली) में बैठी थी। वह मूसल से उसे चला रही थी और झाड़ू से अपने पीछे के निशान मिटाती जा रही थी।

बाबा यागा ने अपनी भयानक आवाज़ में पूछा, "यहाँ इंसानी मांस की महक कैसे आ रही है? तुम कौन हो?"

वासिलिसा ने डरते हुए कहा, "मैं वासिलिसा हूँ। मेरी सौतेली माँ ने मुझे आपसे आग लेने भेजा है।"

बाबा यागा ने कुटिलता से मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है, लेकिन तुम्हें पहले मेरे काम करने होंगे। अगर तुमने काम पूरा नहीं किया, तो मैं तुम्हें खा जाऊँगी!"

अगले दिन बाबा यागा जंगल में चली गई और वासिलिसा को असंभव काम दे गई, जैसे मिट्टी में से खसखस के लाखों बीज अलग करना और पूरे घर को चमकाना। वासिलिसा रोने लगी, लेकिन उसकी जादुई गुड़िया ने पल भर में वह सारा काम पूरा कर दिया।

शाम को जब बाबा यागा लौटी और सारा काम पूरा देखा, तो वह बहुत हैरान हुई। उसने पूछा, "तुमने यह सब अकेले कैसे किया?"

वासिलिसा ने सच बताते हुए कहा, "मेरी माँ के आशीर्वाद से।"

बाबा यागा को 'आशीर्वाद' शब्द से सख्त नफरत थी। उसने वासिलिसा को तुरंत घर से बाहर निकाल दिया। लेकिन जाते-जाते उसने हड्डियों की बाड़ से एक खोपड़ी निकाली, जिसकी आँखों में आग जल रही थी, और उसे एक छड़ी पर टांगकर वासिलिसा को दे दिया। "ले जा अपनी आग, और भाग जा यहाँ से!" बाबा यागा चिल्लाई।

वासिलिसा अपनी गुड़िया की मदद से सुरक्षित अपने घर लौट आई। जैसे ही वह घर के अंदर पहुँची, उस खोपड़ी की आँखों से निकली जादुई और तेज़ आग ने उसकी दुष्ट सौतेली माँ और बहनों को जलाकर राख कर दिया। जब वासिलिसा के पिता लौटे, तो उन्होंने अपनी बेटी को गले लगा लिया, और फिर वे दोनों खुशी-खुशी रहने लगे।

संस्कृति की झलक:

'बाबा यागा' स्लाविक और रूसी लोक कथाओं का सबसे प्रतिष्ठित और जटिल पात्र है। वह केवल एक क्रूर डायन नहीं है, बल्कि प्रकृति, ज्ञान और जादू की देवी भी मानी जाती है। वह कभी नायकों की परीक्षा लेती है तो कभी उनकी मदद भी करती है। 'मुर्गी के पैरों वाला घर' और 'ओखली-मूसल' बाबा यागा की पहचान हैं, जो आज भी रूस की कला और साहित्य में बहुत लोकप्रिय हैं।

कहानी से सीख:

सच्ची दयालुता, बड़ों का आशीर्वाद और हमारे अंतर्मन की आवाज़ (जिसका प्रतीक वह जादुई गुड़िया थी) हमें दुनिया के सबसे गहरे और भयानक अंधेरे से भी सुरक्षित बाहर निकाल सकती है।

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