Sunday, 19 April 2026

साल्तन का किस्सा (The Tale of Tsar Saltan) - रूस की एक जादुई लोक कथा

साल्तन का किस्सा (The Tale of Tsar Saltan) - रूस की एक अद्भुत लोक कथा 



सर्दियों की एक ठंडी और बर्फीली शाम थी। रूस के एक छोटे से गाँव में एक घर के अंदर तीन बहनें चरखे पर सूत कात रही थीं। बाहर बर्फ गिर रही थी और अंदर अलाव जल रहा था। काम करते-करते वे तीनों आपस में बातें करने लगीं कि अगर उनकी शादी उस देश के महान राजा 'ज़ार साल्तन' से हो जाए, तो वे क्या करेंगी।

सबसे बड़ी बहन ने अपने चरखे को रोकते हुए कहा, "अगर मैं ज़ार की रानी बन जाऊँ, तो मैं पूरे राज्य के लिए एक ऐसी शानदार दावत तैयार करूँगी कि लोग उंगलियाँ चाटते रह जाएंगे। दुनिया भर के पकवान मेरी रसोई में बनेंगे।"

मंझली बहन ने मुस्कुराते हुए कहा, "अगर मुझे ज़ार अपनी रानी बना लें, तो मैं उनके लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन और रेशमी कपड़ा बुनूँगी। ऐसा कपड़ा जो आज तक किसी ने न पहना हो।"

सबसे छोटी बहन, जो सबसे सुंदर और शांत स्वभाव की थी, उसने अपनी आँखें नीची करते हुए कहा, "अगर मैं ज़ार साल्तन की रानी बनी, तो मैं उनके लिए एक ऐसे वीर और साहसी बेटे को जन्म दूँगी, जिसके जैसा योद्धा पूरी दुनिया में कोई दूसरा नहीं होगा।"

वे तीनों बहनें इस बात से बिल्कुल अनजान थीं कि महान ज़ार साल्तन उसी वक्त उनके घर के बाहर बर्फ में खड़े होकर उनकी सारी बातें सुन रहे थे। सबसे छोटी बहन की बात ज़ार के दिल को छू गई।

दरवाज़ा खुला और ज़ार साल्तन अपने शाही कपड़ों में अंदर दाखिल हुए। तीनों बहनें घबराकर उनके सामने झुक गईं। ज़ार साल्तन ने सबसे छोटी बहन का हाथ पकड़ा और कहा, "तुम मेरी रानी बनोगी और मेरे शाही महल में चलोगी। मैं चाहता हूँ कि तुम मुझे वही वीर बेटा दो जिसका तुमने अभी ज़िक्र किया।"

साल्तन का किस्सा (The Tale of Tsar Saltan) - रूस की एक जादुई लोक कथा


फिर उन्होंने बड़ी और मंझली बहन की तरफ देखा और कहा, "तुम दोनों भी महल चलोगी। बड़ी बहन शाही बावर्चीखाने की मुखिया बनेगी और मंझली बहन शाही जुलाही (बुनकर) बनेगी।"

उसी दिन पूरे राज्य में धूमधाम से ज़ार साल्तन और सबसे छोटी बहन की शादी हो गई। लेकिन यह बात बड़ी और मंझली बहन को बिल्कुल रास नहीं आई। उनके दिलों में अपनी ही छोटी बहन के लिए गहरी जलन और नफरत पैदा हो गई।

शादी के कुछ ही समय बाद, ज़ार साल्तन को अपने राज्य की रक्षा के लिए एक लंबे युद्ध पर जाना पड़ा। उन्हें अपनी प्यारी रानी को महल में छोड़कर बहुत दूर सीमा पर जाना पड़ा।

कुछ महीनों बाद, रानी ने एक बहुत ही सुंदर और स्वस्थ राजकुमार को जन्म दिया। बच्चा इतना मजबूत और आकर्षक था कि जो भी उसे देखता, देखता ही रह जाता। रानी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उसने तुरंत अपने सबसे भरोसेमंद घुड़सवार को एक चिट्ठी देकर ज़ार साल्तन के पास भेजा, ताकि राजा को यह खुशखबरी मिल सके।

लेकिन रानी की दोनों ईर्ष्यालु बहनें इसी मौके की तलाश में थीं। उन्होंने उस घुड़सवार को रास्ते में रोक लिया और उसे खूब सारी शराब पिलाकर बेहोश कर दिया। जब वह गहरी नींद में सो गया, तो उन्होंने रानी की चिट्ठी निकाल ली और उसकी जगह एक दूसरी झूठी चिट्ठी रख दी।

उस झूठी चिट्ठी में लिखा था: "महाराज! रानी ने किसी इंसान के बच्चे को जन्म नहीं दिया है, बल्कि एक डरावने और अजीब से जानवर को जन्म दिया है।"

जब वह घुड़सवार युद्ध के मैदान में ज़ार साल्तन के पास पहुँचा और उन्हें वह चिट्ठी दी, तो ज़ार का दिल टूट गया। वह गुस्से और दुख से भर गए। लेकिन उन्हें अपनी रानी से बहुत प्यार था। उन्होंने एक जवाबी चिट्ठी लिखी: "जब तक मैं युद्ध से वापस न लौट आऊँ, तब तक रानी और उस बच्चे को सुरक्षित महल में रखा जाए। मैं आकर खुद फैसला करूँगा।"

घुड़सवार वह चिट्ठी लेकर वापस महल की ओर चल पड़ा। लेकिन लौटते समय भी उन दोनों बहनों ने उस घुड़सवार को रास्ते में पकड़ लिया। उन्होंने फिर से उसे शराब पिलाई और ज़ार साल्तन की चिट्ठी बदलकर एक खौफनाक आदेश लिख दिया।

उस नकली आदेश में लिखा था: "ज़ार साल्तन का यह सख्त आदेश है कि रानी और उसके उस डरावने बच्चे को तुरंत एक मजबूत लकड़ी के बैरल (पीपे) में बंद कर दिया जाए और उसे गहरे समुद्र में फेंक दिया जाए।"

जब महल के मंत्रियों ने ज़ार का यह आदेश पढ़ा, तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। हर कोई फूट-फूट कर रो रहा था, लेकिन राजा का आदेश टालने की किसी में हिम्मत नहीं थी।

रोती और गिड़गिड़ाती हुई रानी को उसके छोटे से नवजात बच्चे के साथ एक बहुत बड़े लकड़ी के बैरल में बैठा दिया गया। उस बैरल पर लोहे की पट्टियाँ जड़ दी गईं और उसे पूरी तरह से सील करके उफनते हुए समुद्र की लहरों के हवाले कर दिया गया।

बैरल के अंदर बिल्कुल घुप्प अंधेरा था। रानी अपने बच्चे को सीने से लगाए ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी। समुद्र की लहरें उस लकड़ी के बैरल को किसी खिलौने की तरह इधर-उधर उछाल रही थीं।

साल्तन का किस्सा (The Tale of Tsar Saltan) - रूस की एक जादुई लोक कथा


लेकिन बैरल के अंदर एक चमत्कार हो रहा था। रानी का वह बच्चा आम इंसानों की तरह साल दर साल बड़ा नहीं हो रहा था, बल्कि वह हर घंटे के हिसाब से बड़ा हो रहा था। कुछ ही दिनों में, वह नवजात बच्चा एक समझदार और ताकतवर नौजवान राजकुमार बन गया। उसका नाम ग्विदोन (Gvidon) था।

जब राजकुमार ग्विदोन ने अपनी माँ को अंधेरे में रोते हुए सुना, तो उसे बहुत दुख हुआ। वह बैरल के अंदर खड़ा हो गया और उसने समुद्र की लहरों से पुकार कर कहा, "ओ महान समुद्र! तुम्हारी लहरें कितनी आज़ाद हैं। तुम जो चाहो कर सकते हो। कृपया मेरी माँ पर रहम करो और हमें किसी सुरक्षित किनारे पर पहुँचा दो।"

मानो समुद्र ने राजकुमार की बात सुन ली हो। लहरें अचानक शांत हो गईं और उन्होंने उस बैरल को बहुत ही नरमी से एक अनजान और सुनसान द्वीप के किनारे पर धकेल दिया।

राजकुमार ग्विदोन ने अपने मजबूत कंधों से बैरल के ढक्कन पर पूरी ताकत से धक्का मारा। लोहे की पट्टियाँ टूट गईं और बैरल का ढक्कन खुल गया। रानी और राजकुमार आज़ाद हो गए।

बाहर सूरज चमक रहा था और सामने एक बहुत ही सुंदर लेकिन बिल्कुल खाली द्वीप था। वहाँ कोई इंसान या घर नहीं था। रानी बहुत भूखी थी। राजकुमार ग्विदोन ने कहा, "माँ, आप यहाँ आराम करें। मैं हमारे खाने के लिए कुछ इंतज़ाम करता हूँ।"

ग्विदोन ने पास ही गिरे एक ओक के पेड़ की मजबूत टहनी तोड़ी और अपनी रेशमी बेल्ट से एक बहुत ही शानदार धनुष तैयार किया। उसने एक नुकीली लकड़ी का तीर बनाया और शिकार की तलाश में समुद्र के किनारे-किनारे चलने लगा।

तभी उसे समुद्र की लहरों के बीच से किसी के चीखने की बहुत दर्दनाक आवाज़ सुनाई दी। वह दौड़कर एक चट्टान के पीछे छिप गया और उसने जो नज़ारा देखा, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था।

समुद्र के पानी में एक बहुत ही खूबसूरत सफेद हंस (Swan) अपनी जान बचाने के लिए फड़फड़ा रहा था। और आसमान से एक विशाल और खूंखार चील (Kite) अपनी नुकीली चोंच और पंजों के साथ उस हंस पर झपटने की कोशिश कर रही थी। दरअसल, वह चील कोई साधारण पक्षी नहीं, बल्कि एक दुष्ट और काला जादूगर था जो उस जादुई हंस को मारना चाहता था।

राजकुमार ग्विदोन ने बिना एक पल गँवाए अपना धनुष उठाया, डोरी को अपने कानों तक खींचा और अपना इकलौता तीर पूरी ताकत से उस खूंखार चील की ओर छोड़ दिया। तीर सीधा चील की गर्दन में जा लगा। चील एक भयानक चीख के साथ खून उगलते हुए समुद्र में गिर पड़ी और हमेशा के लिए डूब गई।

राजकुमार ग्विदोन ने बिना एक पल गँवाए अपना धनुष उठाया, डोरी को अपने कानों तक खींचा और अपना इकलौता तीर पूरी ताकत से उस खूंखार चील की ओर छोड़ दिया। तीर सीधा चील की गर्दन में जा लगा। चील एक भयानक चीख के साथ खून उगलते हुए समुद्र में गिर पड़ी और हमेशा के लिए डूब गई।


वह खूबसूरत सफेद हंस तैरती हुई किनारे पर आई। ग्विदोन यह देखकर हैरान रह गया कि वह हंस इंसानों की भाषा में बोल रही थी।

हंस ने एक मीठी और सुरीली आवाज़ में कहा, "राजकुमार ग्विदोन, तुमने आज एक साधारण पक्षी की जान नहीं बचाई है। तुमने एक दुष्ट जादूगर का अंत किया है। तुमने मेरी जान बचाई है, मैं इस उपकार को कभी नहीं भूलूँगी। तुम परेशान मत होना, मैं तुम्हारी हर मुश्किल में तुम्हारी मदद करूँगी।"

इतना कहकर वह जादुई हंस समुद्र की लहरों में कहीं गायब हो गई।

ग्विदोन खाली हाथ अपनी माँ के पास लौट आया। उसने हंस वाली पूरी कहानी अपनी माँ को बताई। वे दोनों भूखे ही उस सुनसान द्वीप की एक चट्टान के नीचे सो गए।

अगली सुबह जब रानी और राजकुमार की आँख खुली, तो वे अपनी जगह से हिल नहीं पाए। उनके सामने का नज़ारा पूरी तरह से बदल चुका था। जहाँ कल रात तक सिर्फ रेत और जंगली घास थी, वहाँ अब सफेद संगमरमर की दीवारों और सोने के गुंबदों वाला एक बहुत ही विशाल और आलीशान शहर बसा हुआ था। शहर के बीचों-बीच महल की छतें सूरज की रोशनी में चमक रही थीं।

वे दोनों हैरानी से उस शहर की ओर बढ़े। जैसे ही वे शहर के बड़े दरवाज़े पर पहुँचे, दरवाज़ा अपने आप खुल गया। शहर के अंदर ढेरों लोग उनका इंतज़ार कर रहे थे। चारों तरफ ढोल-नगाड़े बजने लगे। शहर के लोग और सेनापति उनके सामने झुक गए।

एक मंत्री ने आगे बढ़कर कहा, "हम आपका ही इंतज़ार कर रहे थे राजकुमार ग्विदोन। इस जादुई शहर के राजा आज से आप हैं।"

राजकुमार ग्विदोन को समझ आ गया कि यह सब उसी जादुई सफेद हंस का किया हुआ चमत्कार है। ग्विदोन और उसकी माँ उस आलीशान महल में राजा और राजमाता की तरह रहने लगे। द्वीप का वह खाली शहर अब खुशियों और चहल-पहल से भर गया था।

सब कुछ बहुत अच्छा था, लेकिन राजकुमार ग्विदोन अक्सर समुद्र के किनारे जाकर दूर क्षितिज की ओर देखा करता था। उसे अपने पिता, ज़ार साल्तन, की बहुत याद आती थी। वह सोचता था कि क्या वह कभी अपने पिता से मिल पाएगा? क्या ज़ार साल्तन को कभी यह सच पता चलेगा कि उनकी रानी और उनका बेटा ज़िंदा हैं?

राजकुमार ग्विदोन अपने जादुई और खूबसूरत शहर का बहुत अच्छा राजा साबित हुआ, लेकिन उसके दिल के एक कोने में अपने पिता ज़ार साल्तन से मिलने की तड़प हमेशा बनी रहती थी।

एक दिन ग्विदोन के द्वीप के पास से कुछ व्यापारियों का एक बड़ा जहाज़ गुज़र रहा था। व्यापारियों ने जब उस सुनसान द्वीप पर सोने के गुंबदों वाला इतना विशाल शहर देखा, तो वे हैरान रह गए। उन्होंने अपना जहाज़ किनारे पर लगा दिया। ग्विदोन ने उन व्यापारियों का अपने महल में बहुत शानदार स्वागत किया और उन्हें स्वादिष्ट दावत दी।

बातों-बातों में व्यापारियों ने बताया, "महाराज, हम दुनिया भर का व्यापार करके अब सीधे ज़ार साल्तन के राज्य में जा रहे हैं।"

यह सुनकर ग्विदोन का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसने कहा, "ज़ार साल्तन को मेरा प्रणाम कहिएगा और उन्हें मेरे इस नए शहर में आने का न्यौता दीजिएगा।"

व्यापारियों के जाने के बाद, ग्विदोन उदास होकर समुद्र के किनारे गया। तभी लहरों के बीच से वही खूबसूरत सफेद हंस बाहर आई। उसने पूछा, "राजकुमार, तुम इतने उदास क्यों हो?"

ग्विदोन ने भारी मन से कहा, "मैं अपने पिता को देखना चाहता हूँ, लेकिन मैं अपनी प्रजा और माँ को छोड़कर जा नहीं सकता।"

हंस ने अपने पंख फड़फड़ाए और समुद्र के पानी की कुछ बूंदें ग्विदोन पर छिड़क दीं। पलक झपकते ही राजकुमार ग्विदोन एक छोटे से भँवरे (Bumblebee) में बदल गया। भँवरा उड़ता हुआ गया और व्यापारियों के जहाज़ के एक छोटे से छेद में छिप गया। जहाज़ ज़ार साल्तन के राज्य की ओर निकल पड़ा।

जब जहाज़ ज़ार साल्तन के महल में पहुँचा, तो व्यापारियों को दरबार में बुलाया गया। ज़ार साल्तन अपने सिंहासन पर उदास बैठे थे। उनके आस-पास वही दोनों दुष्ट बहनें (बावर्ची और जुलाही) बैठी थीं, जिन्होंने रानी को समुद्र में फिंकवाया था। भँवरा बना ग्विदोन भी उड़कर दरबार में एक ऊँचे खंभे पर बैठ गया।

व्यापारियों ने ज़ार साल्तन को बताया, "महाराज, हमने समुद्र के बीच उस सुनसान द्वीप पर एक बहुत ही आलीशान शहर देखा है। वहाँ के राजा राजकुमार ग्विदोन ने आपको वहाँ आने का न्यौता दिया है।"

ज़ार साल्तन यह सुनकर बहुत उत्साहित हुए। "मैं उस जादुई शहर को ज़रूर देखने जाऊँगा!"

लेकिन दोनों दुष्ट बहनों को यह बात पसंद नहीं आई। बड़ी बहन (बावर्ची) ने मुँह बनाते हुए कहा, "इसमें क्या बड़ी बात है? मैंने तो सुना है कि दुनिया में एक ऐसी जादुई गिलहरी है, जो सुरीले गीत गाती है और जब वह अखरोट तोड़ती है, तो उसके छिलके असली सोने के होते हैं और अंदर से पन्ने (Emerald) निकलते हैं। वह होती है असली जादुई चीज़!"

ज़ार साल्तन ने अपना इरादा बदल दिया। भँवरे (ग्विदोन) को अपनी मौसी की इस चालाकी पर बहुत गुस्सा आया। वह भिनभिनाता हुआ नीचे आया और उसने उस दुष्ट बावर्ची मौसी की दाहिनी आँख पर ज़ोर से डंक मार दिया। मौसी दर्द से चीख उठी और उसकी आँख सूज कर बंद हो गई। इससे पहले कि कोई भँवरे को पकड़ पाता, वह खिड़की से उड़कर वापस अपने द्वीप की ओर निकल गया।

अपने शहर लौटकर ग्विदोन वापस इंसान बन गया। वह फिर से समुद्र किनारे गया और उसने सफेद हंस को बुलाया। ग्विदोन ने हंस को उस जादुई गिलहरी के बारे में बताया।

हंस मुस्कुराई। "बस इतनी सी बात? तुम अपने महल के बगीचे में जाकर देखो।"

ग्विदोन दौड़कर महल के बगीचे में गया। वहाँ एक बहुत ही सुंदर क्रिस्टल का घर बना हुआ था, और उसके अंदर एक छोटी सी गिलहरी मीठे स्वर में गीत गा रही थी। वह गिलहरी अपने छोटे दाँतों से अखरोट तोड़ रही थी, जिनके छिलके शुद्ध सोने के थे और अंदर से हरे रंग के चमकदार पन्ने निकल रहे थे। ग्विदोन ने तुरंत उस गिलहरी के लिए एक विशेष रक्षक तैनात कर दिया।

कुछ महीनों बाद, व्यापारियों का जहाज़ फिर से ग्विदोन के द्वीप पर आया। उन्होंने जादुई गिलहरी को देखा और हैरान रह गए। ग्विदोन फिर से भँवरा बना और उनके जहाज़ के साथ ज़ार साल्तन के दरबार में पहुँच गया।

व्यापारियों ने ज़ार साल्तन को गिलहरी के बारे में बताया। ज़ार फिर से उस शहर में जाने के लिए तैयार हो गए। लेकिन इस बार मंझली मौसी (जुलाही) ने बीच में टोकते हुए कहा, "महाराज, एक गिलहरी में क्या रखा है? मैंने तो सुना है कि समुद्र की लहरों के बीच से 33 जादुई और बेहद ताकतवर शूरवीर निकलते हैं। उनके शरीर पर सोने का कवच होता है और वे पूरे शहर की रक्षा करते हैं। वो होता है असली जादू!"

भँवरे को फिर गुस्सा आ गया। वह तेज़ी से उड़ा और इस बार उसने जुलाही मौसी की बाईं आँख पर डंक मार दिया। वह भी दर्द से चीखने लगी और दरबार में अफरा-तफरी मच गई। भँवरा वापस अपने द्वीप लौट आया।

ग्विदोन ने हंस को 33 शूरवीरों वाली बात बताई। हंस ने कहा, "राजकुमार, वे 33 शूरवीर कोई और नहीं, मेरे ही जादुई भाई हैं।"

उसी शाम, समुद्र के पानी में ज़ोर का उबाल आया और लहरों को चीरते हुए 33 विशाल शूरवीर बाहर निकले। उनके सोने के कवच सूरज की रोशनी में चमक रहे थे। उन शूरवीरों ने ग्विदोन के सामने सिर झुकाया और कहा, "आज से हम आपके इस जादुई शहर की रक्षा करेंगे।"

जब व्यापारी तीसरी बार आए, तो उन्होंने उन 33 शूरवीरों को शहर की रक्षा करते देखा। वे लौटकर ज़ार साल्तन के पास गए और उन्हें यह बात बताई। ज़ार साल्तन ने अपनी गद्दी से उठकर कहा, "अब मुझे कोई नहीं रोक सकता। मैं अपनी आँखों से यह सब देखने जाऊँगा।"

लेकिन दोनों कानी मौसियों ने मिलकर फिर चाल चली। उन्होंने कहा, "महाराज, शूरवीरों से क्या होता है? दुनिया में एक ऐसी राजकुमारी है, जिसकी सुंदरता के आगे चाँद भी फीका है। उसके माथे पर एक चमकता हुआ तारा है और उसकी चोटी के नीचे आधा चाँद चमकता है। जब वह चलती है, तो ऐसा लगता है जैसे कोई देवी ज़मीन पर उतर आई हो। अगर वह राजकुमारी न देखी, तो कुछ नहीं देखा।"

ज़ार साल्तन फिर सोच में पड़ गए। भँवरे को इतना गुस्सा आया कि इस बार उसने दोनों बहनों के बीच बैठी उनकी एक चापलूस बूढ़ी दासी की नाक पर बहुत ज़ोर से डंक मारा और वापस उड़ गया।

ग्विदोन इस बार बहुत उदास था। वह हंस के पास गया और बोला, "हंस, तुमने मुझे सब कुछ दिया। लेकिन मैंने जिस राजकुमारी के बारे में सुना है, जिसके माथे पर तारा और चोटी के नीचे चाँद है, मुझे उससे सच्चा प्यार हो गया है। मैं उसके बिना नहीं रह सकता।"

सफेद हंस ने ग्विदोन की आँखों में देखा और कुछ पल के लिए शांत रही। फिर उसने अपने पंख फड़फड़ाए। अचानक एक बहुत ही तेज़ जादुई रोशनी हुई। ग्विदोन को अपनी आँखें बंद करनी पड़ीं।

जब उसने आँखें खोलीं, तो उसके सामने कोई हंस नहीं थी। बल्कि दुनिया की सबसे खूबसूरत राजकुमारी खड़ी थी। उसके माथे पर एक चमकता हुआ तारा था और उसकी लंबी सुनहरी चोटी के नीचे एक आधा चाँद दमक रहा था।

"राजकुमार ग्विदोन," राजकुमारी ने अपनी उसी मीठी आवाज़ में कहा, "वह राजकुमारी मैं ही हूँ। तुमने उस दुष्ट जादूगर चील से मेरी जान बचाई थी।"

ग्विदोन खुशी से झूम उठा। वह राजकुमारी को लेकर अपनी माँ के पास गया। रानी ने खुशी-खुशी दोनों को आशीर्वाद दिया और उसी दिन पूरे शहर में शानदार जश्न के साथ ग्विदोन और राजकुमारी की शादी हो गई।

उधर, ज़ार साल्तन अब और इंतज़ार नहीं कर सकते थे। उन्होंने अपनी सेना और उन दोनों दुष्ट बहनों को साथ लिया और अपने शाही जहाज़ पर बैठकर ग्विदोन के जादुई शहर की ओर निकल पड़े।

जब ज़ार साल्तन का जहाज़ द्वीप पर पहुँचा, तो तोपों की सलामी के साथ उनका स्वागत किया गया। ग्विदोन ने आगे बढ़कर ज़ार का हाथ पकड़ा और उन्हें महल के अंदर ले गया। ज़ार साल्तन अपनी आँखों पर यकीन नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने उस सोने के अखरोट तोड़ने वाली गिलहरी को देखा। फिर समुद्र से 33 शूरवीरों को निकलते देखा। और अंत में, उन्होंने उस बेहद खूबसूरत राजकुमारी को देखा जिसके माथे पर तारा था।

लेकिन ज़ार की नज़रें किसी और को ढूँढ रही थीं। तभी, महल के दरवाज़े से ग्विदोन की माँ (असली रानी) बाहर आई। सालों बीत गए थे, लेकिन ज़ार साल्तन अपनी प्यारी पत्नी को तुरंत पहचान गए। उनकी आँखों से आँसू बहने लगे।

"मेरी रानी!" ज़ार साल्तन दौड़कर उनके पास गए और उन्हें गले लगा लिया। "मुझे माफ़ कर दो! मैंने सोचा था कि तुम समुद्र में डूब गई।"

रानी ने रोते हुए ज़ार साल्तन के हाथ चूमे। ग्विदोन ने आगे बढ़कर कहा, "पिताजी, मैं आपका वही बेटा हूँ जिसे आपने समुद्र में फेंकने का आदेश दिया था।"

"मेरी रानी!" ज़ार साल्तन दौड़कर उनके पास गए और उन्हें गले लगा लिया। "मुझे माफ़ कर दो! मैंने सोचा था कि तुम समुद्र में डूब गई।"  रानी ने रोते हुए ज़ार साल्तन के हाथ चूमे। ग्विदोन ने आगे बढ़कर कहा, "पिताजी, मैं आपका वही बेटा हूँ जिसे आपने समुद्र में फेंकने का आदेश दिया था।"


ज़ार साल्तन सन्न रह गए। "मैंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था!"

तब जाकर सारा सच सामने आया कि कैसे उन दोनों दुष्ट बहनों ने जलन के मारे राजा और रानी के खत बदल दिए थे। जब दोनों मौसियों ने देखा कि उनका झूठ पकड़ा गया है, तो वे ज़ार साल्तन के पैरों में गिरकर अपनी जान की भीख माँगने लगीं।

ज़ार साल्तन इतने क्रोध में थे कि वे उन दोनों को उसी वक्त फाँसी की सज़ा देना चाहते थे। लेकिन रानी और ग्विदोन का दिल बहुत बड़ा था। अपने परिवार के वापस मिलने की खुशी में उन्होंने उन दोनों दुष्ट बहनों को माफ कर दिया और उन्हें हमेशा के लिए अपने राज्य से बाहर निकाल दिया।

ज़ार साल्तन अपनी रानी, अपने वीर बेटे राजकुमार ग्विदोन और अपनी सुंदर बहू के साथ उस जादुई शहर में खुशी-खुशी रहने लगे। उस दिन वहाँ एक बहुत बड़ी दावत हुई, और जो भी उस दावत में गया, उसने यही कहा कि ज़ार साल्तन के इस जादुई किस्से को दुनिया हमेशा याद रखेगी।

संस्कृति की झलक (Cultural Background):

'द टेल ऑफ़ ज़ार साल्तन' (The Tale of Tsar Saltan) मूल रूप से रूस के सबसे महान कवि 'अलेक्जेंडर पुश्किन' (Alexander Pushkin) द्वारा 1831 में लिखी गई एक कविता है। यह रूसी साहित्य और लोक कथाओं का एक मास्टरपीस है। इसमें इस्तेमाल किए गए जादुई तत्व—जैसे सोने के अखरोट वाली गिलहरी, 33 शूरवीर (जिन्हें रूसी में बोगाटियर कहा जाता है) और जादुई हंस—रूसी संस्कृति में बहुत गहरे रचे-बसे हैं। बाद में निकोलाई रिमस्की-कोर्साकोव ने इस पर एक विश्व प्रसिद्ध ओपेरा भी बनाया, जिसकी धुन 'फ्लाइट ऑफ़ द बंबलबी' (Flight of the Bumblebee) आज भी पूरी दुनिया में लोकप्रिय है।

कहानी से सीख (Moral of the Story):

ईर्ष्या और जलन इंसान को अंधा कर देती है और इसका परिणाम हमेशा बुरा ही होता है। दूसरी ओर, जो लोग दूसरों की मदद करते हैं (जैसे ग्विदोन ने हंस की जान बचाई) और मुसीबत में भी धैर्य नहीं खोते, उनके जीवन में चमत्कार ज़रूर होते हैं। सच्चा प्यार और सच्चाई चाहे कितनी भी छिप जाए, एक दिन वह सामने आ ही जाती है।

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