जर्मनी के खूबसूरत पहाड़ों और वेज़र नदी के किनारे बसा 'हैमलिन' (Hamelin) एक बेहद खुशहाल और अमीर शहर था। लेकिन साल 1284 में, इस शहर पर एक भयानक श्राप टूट पड़ा। शहर में चूहे आ गए!
ये कोई आम चूहे नहीं थे। ये चूहों की एक विशाल फौज थी, जो हर दिन बढ़ती ही जा रही थी। वे इतने निडर और खूंखार थे कि उन्होंने बिल्लियों को भगा दिया, कुत्तों को काट लिया, और यहाँ तक कि पालनों में सोते हुए मासूम बच्चों को भी डराने लगे। उन्होंने रसोइयों के बर्तन खाली कर दिए, अनाज के गोदाम चट कर गए और महिलाओं के कपड़ों में अपने घोंसले बना लिए। पूरे शहर में हर तरफ सिर्फ चीं-चीं की डरावनी आवाज़ें गूंजती रहती थीं। शहर के लोग त्राहि-त्राहि कर उठे।
हारकर शहर के लोग मेयर (Mayor) के पास पहुँचे और विरोध करने लगे। मेयर और उसकी परिषद बुरी तरह घबराई हुई थी, लेकिन उनके पास कोई उपाय नहीं था।
तभी, टाउन हॉल के बड़े दरवाज़े पर एक भारी दस्तक हुई। दरवाज़ा खुला और एक बेहद अजीब अजनबी अंदर दाखिल हुआ। वह बहुत लंबा और दुबला-पतला था। उसने आधे लाल और आधे पीले रंग का एक बेहद अजीब सा लंबा चोगा (Pied coat) पहना हुआ था। उसकी आँखें किसी जादूगर की तरह गहरी और नीली थीं, और उसके होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी। उसके गले में लाल और पीले रंग की डोरी से एक अजीब सी लकड़ी की बाँसुरी लटक रही थी।
अजनबी ने अपनी गंभीर आवाज़ में कहा, "माननीय मेयर, मुझे 'पाइड पाइपर' कहते हैं। मैंने सुना है कि आपका शहर चूहों से परेशान है। मेरे पास एक गुप्त विद्या है, जिससे मैं हर उस चीज़ को अपने पीछे चला सकता हूँ जो ज़मीन पर रेंगती है, तैरती है या उड़ती है। अगर मैं आपके शहर को चूहों से पूरी तरह आज़ाद कर दूँ, तो क्या आप मुझे एक हज़ार सोने के सिक्के देंगे?"
मेयर ने राहत की सांस ली और उत्साह में चिल्लाकर कहा, "एक हज़ार? अरे अजनबी, अगर तुमने हमें इन चूहों से बचा लिया, तो हम तुम्हें पचास हज़ार सोने के सिक्के देंगे! बस किसी तरह इन्हें यहाँ से निकालो।"
पाइपर मुस्कुराया। वह टाउन हॉल से बाहर निकला और शहर के मुख्य चौराहे पर आकर खड़ा हो गया। उसने अपनी वह रहस्यमयी बाँसुरी अपने होंठों से लगाई और एक ऐसी धुन बजानी शुरू की जो हैमलिन के लोगों ने पहले कभी नहीं सुनी थी। वह धुन अजीब तरह से सम्मोहित करने वाली, तीखी और जादुई थी।
जैसे ही वह धुन हवा में गूंजी, एक चमत्कार हुआ! शहर के हर घर, हर तहखाने, हर छत और हर नाली से चूहों का झुंड बाहर निकलने लगा। बड़े चूहे, छोटे चूहे, भूरे चूहे, काले चूहे... लाखों की तादाद में चूहे चीं-चीं करते हुए बाहर आ गए। पाइपर ने मुड़कर नदी की तरफ चलना शुरू किया और बाँसुरी बजाता रहा। चूहों की वह विशाल फौज किसी सम्मोहन में बंधी उसके पीछे-पीछे चलने लगी।
पाइपर वेज़र नदी (Weser River) के किनारे पहुँचा और नदी के गहरे पानी में उतरने लगा। चूहे भी बिना सोचे-समझे उसके पीछे पानी में कूद पड़े। कुछ ही पलों में, शहर का एक-एक चूहा उस तेज़ नदी की धार में बहकर डूब गया। हैमलिन शहर चूहों से पूरी तरह आज़ाद हो चुका था!
शहर के लोग खुशी से नाचने लगे। मेयर ने राहत की सांस ली। अगले दिन पाइड पाइपर अपना इनाम लेने टाउन हॉल पहुँचा। "मेयर साहब, मैंने अपना वादा पूरा किया। अब मेरे एक हज़ार सोने के सिक्के मुझे दे दीजिए।"
लेकिन चूहों के जाने के बाद मेयर के मन में लालच आ गया था। उसने पाइपर का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, "एक हज़ार सोने के सिक्के? एक छोटी सी बाँसुरी बजाने के लिए? तुम तो जानते हो कि मरे हुए चूहे वापस नहीं आ सकते। चलो, मैं तुम्हें इनाम के तौर पर 50 सिक्के दे देता हूँ, और यहाँ से चले जाओ।"
पाइपर की रहस्यमयी मुस्कान गायब हो गई। उसकी नीली आँखों में एक खौफनाक क्रोध उभर आया। उसने बेहद ठंडी आवाज़ में कहा, "मेयर, अपना वादा मत तोड़ो। मुझे मेरा पूरा इनाम चाहिए, वरना मैं तुम्हारे शहर में एक ऐसी धुन बजाऊंगा जिसे तुम कभी भूल नहीं पाओगे।"
मेयर ने ठहाका लगाया और उसे धक्के मारकर बाहर निकाल दिया।
कुछ दिनों बाद, 26 जून को, जब शहर के सभी बड़े लोग चर्च में प्रार्थना कर रहे थे, पाइपर वापस लौटा। इस बार वह चौराहे पर खड़ा हुआ और उसने एक नई धुन छेड़ी। यह धुन चूहों वाली धुन से बिल्कुल अलग थी। यह बेहद मीठी, खुशी से भरी और सपनों जैसी थी।
इस बार घरों से चूहे नहीं, बल्कि हैमलिन शहर के बच्चे बाहर निकलने लगे! हर घर से हँसते-खेलते, नाचते-गाते मासूम बच्चे पाइपर की धुन के पीछे खिंचे चले आ रहे थे। पाइपर बाँसुरी बजाते हुए शहर के बाहर कोपेलबर्ग (Koppelberg) नाम के एक बड़े पहाड़ की ओर चलने लगा।
चर्च से बाहर निकले माता-पिता अपने बच्चों को जाता देख चीखने लगे, लेकिन वे अपनी जगह से एक कदम भी नहीं हिल पा रहे थे। जैसे किसी जादू ने उन्हें ज़मीन से चिपका दिया हो। पाइपर बच्चों को लेकर उस ऊंचे पहाड़ के पास पहुँचा। अचानक, पहाड़ के बीचों-बीच एक जादुई दरवाज़ा खुला। पाइपर बाँसुरी बजाते हुए अंदर चला गया और हैमलिन के सभी 130 बच्चे हँसते हुए उसके पीछे उस अंधेरी गुफा में चले गए। जैसे ही आखिरी बच्चा अंदर गया, पहाड़ का दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद हो गया।
पीछे सिर्फ तीन बच्चे छूट गए थे—एक जो लंगड़ा था और तेज़ नहीं चल पाया, एक जो बहरा था और धुन नहीं सुन पाया, और एक जो अंधा था और रास्ता भटक गया था। उन्हीं बच्चों ने रोते हुए शहर वालों को बताया कि उनके बच्चे कहाँ चले गए।
मेयर का लालच और एक टूटा हुआ वादा हैमलिन शहर को हमेशा के लिए वीरान कर गया। उस दिन के बाद, हैमलिन शहर में कभी किसी बच्चे की हँसी नहीं गूंजी।
संस्कृति की झलक:
'पाइड पाइपर' कोई साधारण लोक कथा नहीं है, बल्कि इसे जर्मनी के हैमलिन शहर के इतिहास की एक सच्ची घटना माना जाता है। आज भी शहर के पुराने रिकॉर्ड्स में लिखा है कि "26 जून 1284 को हैमलिन के 130 बच्चे गायब हो गए थे।" इतिहासकार मानते हैं कि शायद यह किसी महामारी (जैसे प्लेग) या बच्चों के पलायन का प्रतीक है, लेकिन सदियों से इसे ब्रदर्स ग्रिम द्वारा एक रहस्यमयी मिथक के रूप में सुनाया जाता रहा है। आज भी हैमलिन शहर की उस सड़क पर जहाँ से बच्चे गुज़रे थे, संगीत बजाना सख्त मना है।
कहानी से सीख:
यह कहानी इंसान को एक बहुत बड़ा सबक देती है: कभी अपना वादा मत तोड़ो। लालच और धोखेबाजी (विशेषकर उन लोगों के साथ जिन्होंने आपकी मुश्किल समय में मदद की हो) का परिणाम इतना भयानक हो सकता है कि उसकी भरपाई ज़िंदगी भर नहीं की जा सकती।
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