Thursday, 16 April 2026

कोशचेई द इमोर्टल (Koschei the Deathless) - रूस की एक अद्भुत लोक कथा

कोशचेई द इमोर्टल (Koschei the Deathless) - रूस की एक अद्भुत लोक कथा

कोशचेई द इमोर्टल (Koschei the Deathless) - रूस की एक अद्भुत लोक कथा



बहुत पुरानी बात है, रूस के एक विशाल साम्राज्य में राजकुमार इवान रहा करता था। इवान की तीन सुंदर बहनें थीं—राजकुमारी मार्या, राजकुमारी ओल्गा और राजकुमारी अन्ना। जब इवान अभी छोटा ही था, तब उसके माता-पिता बहुत बीमार पड़ गए। मरने से पहले राजा और रानी ने इवान को पास बुलाया और कहा, "बेटा, अपनी बहनों का हमेशा ख्याल रखना। और जो भी सबसे पहले उनका हाथ माँगने आए, उन्हें मना मत करना। उनकी शादी कर देना।" इवान ने रोते हुए अपने माता-पिता को वचन दिया।

राजा-रानी के जाने के बाद चारों भाई-बहन महल में अकेले रह गए। एक दिन वे सभी महल के बगीचे में बैठे थे कि अचानक आसमान बिल्कुल काला हो गया। भयानक आंधी चलने लगी और आसमान से एक विशाल बाज़ (Falcon) उड़ता हुआ आया। बाज़ सीधे उनके आँगन में उतरा और ज़मीन पर पैर रखते ही वह एक बहुत ही सुंदर और नौजवान राजकुमार में बदल गया।

बाज़ राजकुमार का आगमन (बहन की शादी)


राजकुमार ने इवान से कहा, "इवान, मैं तुम्हारी सबसे बड़ी बहन मार्या से शादी करना चाहता हूँ।" इवान को अपने माता-पिता का वचन याद था। उसने तुरंत हाँ कर दी। बाज़ राजकुमार ने मार्या का हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ आसमान में ले उड़ा।

एक साल बीत गया। इवान अपनी दो बहनों के साथ रह रहा था। एक दिन फिर से भयानक आंधी आई और इस बार एक विशाल गरुड़ (Eagle) महल के आँगन में उतरा। ज़मीन पर आते ही वह भी एक सुंदर राजकुमार बन गया और उसने मंझली बहन ओल्गा का हाथ माँगा। इवान ने उसे भी विदा कर दिया।

अगले साल फिर वैसा ही हुआ। इस बार एक काला कौआ (Raven) आया और ज़मीन पर उतरकर राजकुमार बन गया। उसने सबसे छोटी बहन अन्ना का हाथ माँगा। इवान ने माता-पिता के वचन के अनुसार अन्ना को भी उसके साथ विदा कर दिया।

अब राजकुमार इवान उस बड़े से महल में बिल्कुल अकेला रह गया था। उसे अपनी बहनों की बहुत याद आती थी। एक पूरा साल अकेले बिताने के बाद इवान ने फैसला किया कि वह अपनी बहनों से मिलने जाएगा। उसने अपना कवच पहना, अपनी तलवार ली और अपने घोड़े पर बैठकर सफर पर निकल पड़ा।

चलते-चलते इवान एक बहुत बड़े मैदान में पहुँचा। वहाँ का नज़ारा खौफनाक था। पूरा मैदान कटे हुए सिरों और मरे हुए सैनिकों से भरा पड़ा था। इवान ने एक घायल सैनिक से पूछा, "इतनी बड़ी और ताकतवर सेना को किसने हराया है?"

सैनिक ने आखिरी साँस लेते हुए कहा, "यह सेना मार्या मोरेव्ना (Marya Morevna) ने हराई है। वह एक बहुत ही सुंदर लेकिन खतरनाक योद्धा रानी है।"

इवान और आगे बढ़ा तो उसे सफेद रंग के कई तंबू दिखाई दिए। यह मार्या मोरेव्ना का शिविर था। जब मार्या मोरेव्ना ने इवान को देखा, तो वह उसकी सुंदरता और निडरता से बहुत प्रभावित हुई। मार्या ने इवान को अपने तंबू में बुलाया। दोनों ने एक-दूसरे के साथ खूब बातें कीं और जल्द ही उन्हें एक-दूसरे से प्यार हो गया। मार्या मोरेव्ना इवान को अपने राज्य ले गई और दोनों ने शादी कर ली।

कुछ दिन बहुत खुशी से बीते। फिर एक दिन मार्या मोरेव्ना को किसी दूसरे राज्य से युद्ध करने के लिए जाना पड़ा। जाने से पहले उसने इवान को अपने पूरे महल की चाबियाँ दीं और कहा, "प्यारे इवान, तुम इस महल के राजा हो। तुम जिस कमरे में चाहो जा सकते हो, लेकिन एक बात मेरी हमेशा याद रखना। इस महल के तहखाने में एक लोहे का दरवाज़ा है। उसे कभी मत खोलना, वरना हम दोनों पर बहुत बड़ी मुसीबत आ जाएगी।"

इवान ने वादा किया कि वह उस दरवाज़े को हाथ भी नहीं लगाएगा। मार्या अपनी सेना लेकर युद्ध पर चली गई।

शुरुआत में इवान ने महल के बाकी कमरों में घूमकर अपना समय बिताया। लेकिन इंसान का दिमाग ऐसा होता है कि जिस काम के लिए मना किया जाए, वह वही करना चाहता है। इवान के मन में भी यही सवाल घूमने लगा कि आखिर उस कमरे में ऐसा क्या है जो मार्या ने उसे खोलने से मना किया?

आखिरकार इवान से रहा नहीं गया। वह चाबियों का गुच्छा लेकर तहखाने में गया। वहाँ एक भारी लोहे का दरवाज़ा था। इवान ने चाबी लगाई और दरवाज़ा खोल दिया।

कमरे के अंदर बहुत अंधेरा और सीलन थी। जब इवान की आँखें अंधेरे की आदी हुईं, तो उसने जो देखा उससे वह सन्न रह गया। कमरे के बीचों-बीच लोहे की बारह मोटी ज़ंजीरों से एक बूढ़ा और भयानक दिखने वाला आदमी बँधा हुआ था। उसकी हड्डियाँ बाहर झाँक रही थीं और वह बहुत कमज़ोर लग रहा था।

यह कोई और नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे खतरनाक जादूगर—'कोशचेई द इमोर्टल' (Koschei the Deathless) था, जिसे मार्या मोरेव्ना ने युद्ध में हराकर यहाँ कैद किया था।

कोशचेई ने इवान को देखा और बहुत ही कमज़ोर आवाज़ में गिड़गिड़ाते हुए बोला, "राजकुमार, मुझ पर दया करो। मैं पिछले दस सालों से यहाँ बिना कुछ खाए-पिए बँधा हूँ। मेरा गला सूख गया है। मुझे बस एक बाल्टी पानी पिला दो। मैं तुम्हारा यह एहसान ज़िंदगी भर नहीं भूलूंगा।"

इवान को उस बूढ़े आदमी की हालत देखकर बहुत दया आ गई। उसने सोचा, 'एक बाल्टी पानी से क्या ही हो जाएगा।' वह दौड़कर गया और एक बाल्टी भर कर पानी ले आया।

इवान द्वारा कोशचेई को मुक्त करना


कोशचेई ने एक ही साँस में पूरी बाल्टी खाली कर दी। पानी पीते ही उसकी आँखों में एक चमक आ गई। उसने कहा, "राजकुमार, तुमने मेरी जान बचाई है। लेकिन मेरी प्यास अभी बुझी नहीं है। मुझे एक बाल्टी पानी और दे दो।"

इवान ने उसे दूसरी बाल्टी पानी भी पिला दिया। पानी पीते ही कोशचेई के कमज़ोर शरीर में थोड़ी जान आने लगी। उसने इवान से विनती की, "बस एक बाल्टी पानी और। इसके बाद मैं कभी तुमसे कुछ नहीं माँगूंगा।"

इवान ने जैसे ही उसे तीसरी बाल्टी पानी पिलाया, एक भयंकर घटना घटी। तीसरी बाल्टी पीते ही कोशचेई की सारी जादुई ताकतें वापस लौट आईं। उसने ज़ोर से दहाड़ मारी और अपने दोनों हाथ झटके। लोहे की वे बारह भारी ज़ंजीरें किसी कच्चे धागे की तरह टूट कर ज़मीन पर गिर गईं।

कोशचेई ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा। उसकी हँसी से पूरे महल की दीवारें काँपने लगीं। "धन्यवाद, इवान!" कोशचेई ने चिल्लाकर कहा। "तुमने मुझे आज़ाद कर दिया है। लेकिन इसके बदले में अब तुम अपनी पत्नी मार्या मोरेव्ना को ज़िंदगी में कभी नहीं देख पाओगे!"

इतना कहते ही कोशचेई एक काले बवंडर में बदल गया और खिड़की तोड़कर आसमान में उड़ गया। वह सीधा युद्ध के मैदान की ओर गया। वहाँ उसने मार्या मोरेव्ना को पकड़ा और उसे हवा में उठाकर अपने साथ अपनी दूर की दुनिया में ले गया।

इतना कहते ही कोशचेई एक काले बवंडर में बदल गया और खिड़की तोड़कर आसमान में उड़ गया। वह सीधा युद्ध के मैदान की ओर गया। वहाँ उसने मार्या मोरेव्ना को पकड़ा और उसे हवा में उठाकर अपने साथ अपनी दूर की दुनिया में ले गया।


जब इवान को अपनी इस भारी गलती का अहसास हुआ, तो वह फूट-फूट कर रोने लगा। "मैंने यह क्या कर दिया! मेरी ही बेवकूफी से मेरी पत्नी छिन गई।" लेकिन इवान सिर्फ रोने वालों में से नहीं था। उसने तय किया कि चाहे उसे अपनी जान गँवानी पड़े, वह अपनी पत्नी को खोज कर लाएगा।

उसने अपना घोड़ा तैयार किया और मार्या को ढूँढने निकल पड़ा। चलते-चलते एक पूरा दिन बीत गया। रास्ते में उसे एक बहुत ही सुंदर और चाँदी का चमकता हुआ महल दिखाई दिया। यह महल उसी बाज़ राजकुमार का था, जिससे इवान ने अपनी सबसे बड़ी बहन मार्या की शादी की थी।

बाज़ राजकुमार और मार्या ने अपने भाई इवान को देखा तो बहुत खुश हुए। उन्होंने इवान का खूब स्वागत किया। इवान तीन दिन वहाँ रुका। जब वह वहाँ से जाने लगा तो उसने अपनी एक चाँदी की चम्मच अपनी बहन को दी और कहा, "दीदी, मेरी यह चम्मच अपने पास रखना। अगर यह चम्मच कभी काली पड़ जाए, तो समझ लेना कि मैं मर चुका हूँ।" यह कहकर इवान आगे बढ़ गया।

कुछ दिन और चलने के बाद उसे एक सोने का महल मिला। यह गरुड़ राजकुमार का महल था, जहाँ उसकी दूसरी बहन ओल्गा रहती थी। वहाँ भी इवान का खूब सत्कार हुआ। जाने से पहले इवान ने अपना एक चाँदी का काँटा (Fork) ओल्गा को दिया और वही बात दोहराई, "अगर यह काँटा काला हो जाए, तो समझ लेना कि मेरी मौत हो गई है।"

वहाँ से विदा होकर इवान और आगे चला और अंत में एक हीरे के महल तक पहुँचा, जहाँ उसकी सबसे छोटी बहन अन्ना अपने पति कौए राजकुमार के साथ रहती थी। अन्ना ने अपने भाई को गले लगा लिया। वहाँ से निकलते समय इवान ने अपनी एक चाँदी की डिब्बी अन्ना को दी और मौत वाली निशानी के बारे में बताया।

अपनी तीनों बहनों से मिलकर इवान का हौसला बढ़ गया था। महीनों तक जंगलों और पहाड़ों में भटकने के बाद, आखिरकार इवान को 'कोशचेई द इमोर्टल' का डरावना और विशाल महल मिल गया।

इवान छुपता-छुपाता महल के अंदर गया। उस समय कोशचेई महल में नहीं था, वह शिकार पर गया हुआ था। इवान ने मार्या मोरेव्ना को एक कमरे में रोते हुए पाया। मार्या ने जैसे ही इवान को देखा, वह उससे लिपट गई। "इवान! तुम यहाँ क्यों आए? कोशचेई बहुत खतरनाक है, वह तुम्हें मार डालेगा। तुमने उस दरवाज़े को खोलकर बहुत बड़ी गलती कर दी थी।"

इवान ने कहा, "मुझे माफ कर दो मार्या। मैं अपनी गलती सुधारने आया हूँ। चलो मेरे साथ, हम अभी भाग चलते हैं।"

मार्या इवान के घोड़े पर बैठ गई और वे दोनों तेज़ी से वहाँ से भाग निकले।

उधर, कोशचेई शिकार से लौट रहा था। तभी उसके जादुई घोड़े ने अचानक ठोकर खाई। कोशचेई ने अपने घोड़े से पूछा, "अरे मेरे जादुई घोड़े, तू लड़खड़ा क्यों रहा है? क्या तुझे कोई खतरा महसूस हो रहा है?"

जादुई घोड़े ने इंसानों की आवाज़ में कहा, "मालिक, राजकुमार इवान आपके महल में आया था और वह आपकी मार्या मोरेव्ना को भगा कर ले जा रहा है।"

कोशचेई ज़ोर से हँसा। "अरे, वह पैदल और एक साधारण घोड़े पर है। हम अगर आराम से सो लें, खाना खा लें, तब भी हम उसे आसानी से पकड़ लेंगे।"

कोशचेई ने महल में जाकर आराम से खाना खाया, थोड़ी देर सोया और फिर अपने जादुई घोड़े पर बैठा। कोशचेई के घोड़े की एक छलाँग में मीलों का रास्ता तय हो जाता था। कुछ ही देर में कोशचेई ने इवान और मार्या को पकड़ लिया।

उसने इवान को ज़मीन पर पटक दिया और मार्या को अपने घोड़े पर बैठा लिया। कोशचेई ने इवान से कहा, "इवान, तूने मुझे तीन बाल्टी पानी पिलाकर मेरी जान बचाई थी। इसलिए इस पहली गलती के लिए मैं तुझे ज़िंदा छोड़ रहा हूँ। लेकिन अगर तूने दोबारा मार्या को ले जाने की कोशिश की, तो मैं तेरे टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा।" यह कहकर कोशचेई मार्या को वापस अपने महल ले गया।

इवान ज़मीन पर पड़ा रोता रहा। लेकिन उसने हार नहीं मानी। अगले दिन, जब कोशचेई फिर शिकार पर गया, इवान फिर से महल में घुसा और मार्या को अपने साथ भगा ले जाने लगा।

कोशचेई के घोड़े ने फिर ठोकर खाई और उसे बताया कि इवान मार्या को ले गया है। कोशचेई ने फिर आराम किया और पलक झपकते ही उन्हें पकड़ लिया। इस बार उसने इवान से कहा, "मैंने तुझे पानी पिलाने के बदले दो बार माफ कर दिया है। अब पानी का सारा कर्ज़ खत्म हो गया। तीसरी बार तू मेरे हाथों से नहीं बचेगा।"

लेकिन इवान का प्यार इतना पक्का था कि वह अपनी पत्नी के बिना वापस जाने को तैयार नहीं था। तीसरे दिन, इवान फिर गया। मार्या ने रोते हुए कहा, "इवान, इस बार वह तुम्हें पक्का मार डालेगा। तुम लौट जाओ।" पर इवान नहीं माना। वह मार्या को लेकर फिर भागा।

इस बार कोशचेई ने कोई आराम नहीं किया। वह तुरंत अपने घोड़े पर दौड़ा और कुछ ही पलों में उन्हें पकड़ लिया। इस बार कोशचेई बहुत गुस्से में था। उसने अपनी भारी तलवार निकाली और इवान को वहीं काट कर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए। कोशचेई ने उन टुकड़ों को लकड़ी के एक बड़े बैरल (ड्रम) में भरा, उसे लोहे की पट्टियों से कसकर बाँधा और उस बैरल को उफनते हुए समुद्र में फेंक दिया।

उसी समय, दूर इवान की तीनों बहनों के महलों में, इवान की दी हुई चाँदी की चम्मच, काँटा और डिब्बी अचानक बिल्कुल काले पड़ गए।

तीनों बहनों ने रोना शुरू कर दिया। उनके पतियों—बाज़, गरुड़ और कौए राजकुमार—को समझ आ गया कि उनका साला इवान मुसीबत में है या मारा गया है। तीनों भाई तुरंत आसमान में उड़े। बाज़ राजकुमार ने अपनी तेज़ नज़रों से समुद्र में तैरते हुए उस लकड़ी के बैरल को ढूँढ निकाला। गरुड़ राजकुमार ने अपने पंजों से उस भारी बैरल को समुद्र से बाहर निकाला और ज़मीन पर रखा।

कौआ राजकुमार जो जादुई दुनिया के राज़ जानता था, तुरंत उड़कर दूर 'मौत और ज़िंदगी के कुएं' (Water of Life and Death) से पानी लेकर आया।

उन्होंने बैरल तोड़ा और इवान के टुकड़ों को एक साथ रखा। सबसे पहले कौए ने उन टुकड़ों पर 'मौत का पानी' (Water of Death) छिड़का। ऐसा करते ही सारे टुकड़े आपस में जुड़ गए और घाव भर गए। फिर उसने इवान के शरीर पर 'ज़िंदगी का पानी' (Water of Life) छिड़का।

इवान ने एक लंबी साँस ली और उठ कर बैठ गया। उसने जम्हाई लेते हुए कहा, "अरे, मैं कितनी गहरी नींद में सो गया था।"

उसके जीजाओं ने कहा, "हाँ, और अगर हम नहीं आते, तो तुम हमेशा के लिए सोते ही रह जाते। कोशचेई ने तुम्हें मार दिया था।"

इवान ने अपने जीजाओं का धन्यवाद किया। इवान को समझ आ गया था कि एक साधारण घोड़े से वह कभी भी कोशचेई के जादुई घोड़े को नहीं हरा सकता।

उसने कहा, "मुझे किसी भी तरह पता लगाना होगा कि कोशचेई को उसका वह जादुई घोड़ा कहाँ से मिला था। जब तक मेरे पास भी वैसा घोड़ा नहीं होगा, मैं मार्या को नहीं बचा पाऊँगा।"

इवान वापस छुपकर कोशचेई के महल के पास गया और मार्या को एक संदेश भिजवाया। उसने मार्या से कहा कि वह प्यार से कोशचेई से पूछे कि उसे वह जादुई घोड़ा कहाँ से मिला था।

अगली रात, मार्या ने बहुत प्यार से कोशचेई से पूछा। कोशचेई को लगा कि इवान तो अब मर चुका है, इसलिए उसने बेफिक्र होकर सच बता दिया। उसने कहा, "मेरा घोड़ा कोई आम घोड़ा नहीं है। मुझे यह घोड़ा 'बाबा यागा' (Baba Yaga) नाम की एक बहुत भयानक डायन से मिला था। वह डायन आग की नदी के पार रहती है। उसके पास दुनिया के सबसे बेहतरीन घोड़े हैं। लेकिन जो भी इंसान उससे घोड़ा माँगने जाता है, वह उसे तीन दिन तक अपने घोड़ों को चराने का काम देती है। अगर इंसान एक भी घोड़ा खो दे, तो बाबा यागा उसका सिर काट कर अपने घर की चारदीवारी पर सजा देती है।"

मार्या ने यह सारी बात चुपके से इवान तक पहुँचा दी। इवान जान गया था कि अब उसका रास्ता और भी खतरनाक होने वाला है। उसे आग की नदी पार करके उस भयानक बाबा यागा के पास जाना था, जो इंसानों को कच्चा चबा जाती थी।

इवान ने एक गहरी साँस ली और आग की नदी की तरफ अपना सफर शुरू कर दिया। 

राजकुमार इवान भारी कदमों से आग की नदी की ओर बढ़ता चला जा रहा था। यह सफर बहुत ही लंबा और थका देने वाला था। कई दिनों तक चलने के कारण इवान के पास रखा सारा खाना खत्म हो चुका था और भूख से उसकी हालत खराब हो रही थी। तभी उसे जंगल में एक भालू का बच्चा दिखाई दिया। इवान ने अपना धनुष उठाया और तीर तान लिया। लेकिन तभी झाड़ियों से एक बड़ी भालू माँ बाहर आई और इंसानी आवाज़ में रोते हुए बोली, "राजकुमार, मेरे बच्चे को मत मारो। मुझे ज़िंदा छोड़ दो, शायद किसी दिन मैं तुम्हारे काम आ सकूँ।" इवान का दिल पसीज गया। उसने अपना धनुष नीचे कर लिया और अपनी भूख बर्दाश्त करते हुए आगे बढ़ गया।

कुछ दूर जाने पर उसने आसमान में एक बाज़ को उड़ते देखा। उसने फिर तीर निकाला, लेकिन बाज़ ने हवा से ही पुकारा, "मुझे मत मारो इवान! मैं एक दिन तुम्हारी मदद करूँगा।" इवान ने उसे भी जाने दिया। भूख से बेहाल इवान जब समुद्र के किनारे पहुँचा, तो उसने देखा कि एक बड़ी सी मछली रेत पर तड़प रही थी। इवान उसे भून कर खा सकता था, लेकिन उसने उस मछली को उठाया और वापस गहरे पानी में छोड़ दिया। मछली ने पानी में गोता लगाने से पहले कहा, "तुमने मेरी जान बचाई है, इवान। ज़रूरत पड़ने पर मुझे याद करना।"

आखिरकार, कई मुसीबतों का सामना करते हुए इवान आग की नदी के पास पहुँच गया। नदी में पानी की जगह धधकती हुई लाल आग की लपटें बह रही थीं, जिनकी गर्मी से दूर-दूर तक पेड़-पौधे राख हो चुके थे। नदी पार करने का कोई रास्ता नहीं था। तभी इवान को अपनी बहन का दिया हुआ एक जादुई रूमाल याद आया। उसने वह रूमाल आग की नदी के ऊपर लहराया। देखते ही देखते आग की लपटों के बीच एक लंबा और सुरक्षित पुल बन गया। इवान उस पुल पर से दौड़ता हुआ नदी के पार पहुँच गया और पुल वापस रूमाल में बदल गया।

नदी पार करते ही उसे एक बहुत ही डरावना नज़ारा दिखा। घने काले जंगल के बीच एक झोपड़ी थी, जो ज़मीन पर नहीं, बल्कि मुर्गी के दो विशाल और डरावने पैरों पर खड़ी थी। वह झोपड़ी लगातार गोल-गोल घूम रही थी। झोपड़ी के चारों ओर इंसानी खोपड़ियों और हड्डियों से बनी एक चारदीवारी थी। हर खोपड़ी की आँखों में आग जल रही थी।

कोशचेई द इमोर्टल (Koschei the Deathless) - रूस की एक अद्भुत लोक कथा


इवान ने हिम्मत जुटाकर कहा, "झोपड़ी, ए झोपड़ी! जंगल की तरफ अपनी पीठ कर लो और मेरी तरफ अपना दरवाज़ा!"

इतना कहते ही झोपड़ी चरमराई और इवान की तरफ घूमकर रुक गई। दरवाज़ा खुला और इवान अंदर दाखिल हुआ। अंदर एक बहुत ही भयानक बुढ़िया बैठी थी। उसकी नाक इतनी लंबी थी कि छत को छू रही थी और उसके दाँत लोहे के थे। यह रूस की सबसे खतरनाक डायन 'बाबा यागा' थी।

बाबा यागा ने अपनी गहरी और डरावनी आवाज़ में कहा, "हूँ! मुझे किसी इंसानी खून की महक आ रही है। तू यहाँ कैसे पहुँचा और तुझे क्या चाहिए?"

इवान ने बिना डरे जवाब दिया, "मैं राजकुमार इवान हूँ। मुझे तुम्हारे पास मौजूद दुनिया का सबसे तेज़ जादुई घोड़ा चाहिए, ताकि मैं अपनी पत्नी को बचा सकूँ।"

बाबा यागा ज़ोर से हँसी। "मेरा जादुई घोड़ा? ठीक है! मैं तुझे वह घोड़ा दूँगी, लेकिन इसके लिए तुझे तीन दिन तक मेरी जादुई घोड़ियों को चराना होगा। अगर तूने मेरी एक भी घोड़ी खो दी, तो मैं तेरा सिर धड़ से अलग करके बाहर अपनी चारदीवारी पर सजा दूँगी।"

इवान के पास कोई और रास्ता नहीं था। उसने शर्त मान ली। अगली सुबह बाबा यागा ने अपनी सारी घोड़ियों को बाड़े से बाहर निकाला। वे घोड़ियां इतनी तेज़ थीं कि पलक झपकते ही हवा में उड़ गईं और घने जंगल में गायब हो गईं। इवान पूरा दिन उन्हें ढूँढता रहा, लेकिन उसे एक भी घोड़ी नहीं मिली। वह निराश होकर एक पत्थर पर बैठ गया और रोने लगा कि अब उसकी मौत पक्की है।

तभी झाड़ियों में ज़ोर की हलचल हुई। वही भालू, जिसकी इवान ने जान बचाई थी, जंगल से बाहर आया। उसने कहा, "रो मत इवान। घर जाओ, मैंने सारी घोड़ियों को बाबा यागा के बाड़े में हाँक दिया है।" इवान ने भालू का धन्यवाद किया और वापस लौट आया। बाबा यागा घोड़ियों को वापस आया देखकर बहुत गुस्से में बड़बड़ाने लगी।

दूसरे दिन घोड़ियां फिर गायब हो गईं और इस बार वे ऊँचे पहाड़ों और बादलों के बीच छिप गईं। इवान फिर हार मानकर बैठ गया। लेकिन तभी आसमान से वह बाज़ उड़ता हुआ आया। उसने अपनी तेज़ नज़रों से बादलों में छिपी घोड़ियों को ढूँढ निकाला और उन्हें डराकर वापस झोपड़ी की ओर खदेड़ दिया।

तीसरे दिन, घोड़ियां सीधा समुद्र की गहराई में जाकर छिप गईं। इवान लहरों को देखकर निराश था, तभी वह मछली पानी की सतह पर आई और बोली, "घबराओ मत राजकुमार।" उस मछली ने समुद्र की सारी मछलियों को इकट्ठा किया और उन्होंने घोड़ियों को पानी से बाहर खदेड़ दिया। जाते-जाते मछली ने इवान से कहा, "इवान, जब तुम झोपड़ी में जाओगे, तो बाबा यागा तुम्हें घोड़ा चुनने को कहेगी। तुम किसी भी सुंदर या ताक़तवर घोड़े को मत चुनना। बाड़े के कोने में कीचड़ में सना हुआ एक बहुत ही कमज़ोर और बीमार सा बछेड़ा (Foal) बँधा होगा। तुम उसी को माँगना, क्योंकि वही सबसे जादुई घोड़ा है।"

कोशचेई द इमोर्टल (Koschei the Deathless) - रूस की एक अद्भुत लोक कथा


इवान ने ऐसा ही किया। जब बाबा यागा ने उसे इनाम के तौर पर घोड़ा चुनने को कहा, तो इवान ने उसी कमज़ोर और गंदे बछेड़े पर हाथ रखा। बाबा यागा गुस्से से तिलमिला उठी, लेकिन उसे अपना वादा निभाना पड़ा।

इवान उस बछेड़े को लेकर वहाँ से निकल गया। उसने उसे साफ़ पानी पिलाया और हरी घास खिलाई। कुछ ही पलों में वह बीमार बछेड़ा एक बेहद सुंदर, सुनहरे और आग उगलने वाले जादुई घोड़े में बदल गया। इवान उस पर बैठा और जादुई रूमाल की मदद से वापस आग की नदी पार कर गया।

अब इवान के पास जादुई घोड़ा था, लेकिन उसे पता था कि 'कोशचेई द इमोर्टल' को सीधे युद्ध में नहीं मारा जा सकता। मार्या ने उसे बताया था कि कोशचेई की जान उसके शरीर में नहीं, बल्कि दूर 'बुयान' (Buyan) नाम के एक द्वीप पर छिपी है।

इवान अपने तेज़ घोड़े पर बैठकर समंदर चीरता हुआ बुयान द्वीप पर पहुँचा। वहाँ एक बहुत विशाल और पुराना ओक (Oak) का पेड़ था। कोशचेई की मौत उसी पेड़ के अंदर छिपी थी। इवान ने पेड़ को काटने की कोशिश की, लेकिन वह बहुत मोटा था। तभी वह भालू वहाँ पहुँच गया। उसने अपनी पूरी ताक़त से उस ओक के पेड़ को जड़ से उखाड़ फेंका।

पेड़ के उखड़ते ही उसकी जड़ों में से एक भारी लोहे का संदूक नीचे गिरा और टूट गया। संदूक के टूटते ही उसके अंदर से एक खरगोश छलाँग मारकर बहुत तेज़ी से भागा। इवान उसे नहीं पकड़ सकता था, लेकिन तभी बाज़ ने आसमान से गोता लगाया और अपने पंजों में खरगोश को दबोच लिया।

डर के मारे खरगोश के मुँह से एक बत्तख बाहर निकली और आसमान में उड़ने लगी। बाज़ ने तुरंत बत्तख पर हमला किया। बत्तख के मुँह से अचानक एक चमकता हुआ अंडा गिरा और सीधे गहरे समुद्र में जाकर डूब गया।

इवान ने अपना सिर पकड़ लिया। 'अब यह अंडा कहाँ से लाऊँ?' तभी समुद्र में हलचल हुई और वही बड़ी मछली अपने मुँह में वह अंडा दबाए बाहर आई। इवान ने अंडा अपने हाथ में ले लिया। वह जानता था कि कोशचेई की मौत इसी अंडे के अंदर छिपी है।

अंडा लेकर इवान सीधा कोशचेई के महल की ओर दौड़ा। मार्या मोरेव्ना उसे देखकर बहुत खुश हुई, लेकिन तभी आसमान में बिजली कड़की और कोशचेई अपने जादुई घोड़े पर सवार होकर आ पहुँचा। इवान को ज़िंदा देखकर वह हैरान रह गया।

"तू फिर आ गया इवान? इस बार मैं तुझे राख बना दूँगा!" कोशचेई ने अपनी भारी गदा उठाई।

इवान ने बिना डरे अपनी जेब से वह अंडा निकाला और हवा में उठा लिया। अंडे को देखते ही कोशचेई के चेहरे का रंग उड़ गया। उसकी गदा उसके हाथ से छूट कर गिर पड़ी। "नहीं इवान! उस अंडे को मत तोड़ना! मैं तुम्हें जो चाहो वो दूँगा, पूरा राज्य दूँगा, मार्या को भी ले जाओ, बस उस अंडे को मत तोड़ना।" कोशचेई गिड़गिड़ाने लगा और दर्द से तड़पने लगा, मानो अंडे पर इवान की उंगलियों का दबाव सीधा उसके दिल पर पड़ रहा हो।

कोशचेई द इमोर्टल (Koschei the Deathless) - रूस की एक अद्भुत लोक कथा


"तुमने बहुत से बेगुनाहों की जान ली है कोशचेई। अब तुम्हारी बारी है," इवान ने कहा और एक ही झटके में उस अंडे को अपने हाथों से फोड़ दिया।

अंडे के टूटते ही उसके अंदर से एक छोटी सी, चमकती हुई लोहे की सुई बाहर निकली। यही सुई कोशचेई की अमरता का राज़ थी। कोशचेई दर्द से चीखता हुआ ज़मीन पर गिर पड़ा। वह रेंगता हुआ इवान की तरफ बढ़ने लगा।

इवान ने बिना कोई समय गँवाए उस सुई के नुकीले सिरे को अपनी उंगलियों से 'कड़क' की आवाज़ के साथ दो टुकड़ों में तोड़ दिया।

सुई के टूटते ही एक भयानक धमाका हुआ। दुनिया का सबसे खूंखार और अमर दुष्ट जादूगर कोशचेई उसी पल राख के एक ढेर में बदल गया और हवा के झोंके के साथ हमेशा के लिए उड़ गया।

मार्या मोरेव्ना दौड़कर इवान के गले लग गई। इवान की बहादुरी और सच्चे प्यार ने मौत को भी हरा दिया था। दोनों अपने जादुई घोड़े पर बैठे और अपने राज्य लौट आए, जहाँ इवान की तीनों बहनें और उनके राजकुमार पति उनका इंतज़ार कर रहे थे। उसके बाद इवान और मार्या ने अपने राज्य में कई सालों तक सुख और शांति से राज किया।

संस्कृति की झलक (Cultural Background):

'कोशचेई द इमोर्टल' (Koschei the Deathless) स्लाविक और रूसी लोक कथाओं का सबसे प्रसिद्ध खलनायक है। यह कहानी बुराई के 'आत्मा छिपाने' (External Soul) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसे बाद में जे.आर.आर. टोल्किन (सॉरॉन की अंगूठी) और जे.के. रोलिंग (वोल्डेमॉर्ट के होरक्रक्स) जैसे लेखकों ने अपनाया। 'बाबा यागा' और मुर्गी के पैरों वाली झोपड़ी 'इज़बुश्का' (Izbushka) रूसी पौराणिक कथाओं के सबसे रहस्यमयी हिस्से हैं, जो प्रकृति की क्रूरता और न्याय दोनों का प्रतीक माने जाते हैं।

कहानी से सीख (Moral of the Story):

बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली और 'अमर' क्यों न लगे, उसका अंत निश्चित है। दया, धैर्य और प्रकृति (जानवरों) के प्रति हमारी करुणा, मुसीबत के समय हमेशा हमारे काम आती है। जो दूसरों पर दया करता है, भाग्य भी उसी का साथ देता है।

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